भारत का नाम हिंदुस्तान कैसे पड़ा और यहां के लोग हिंदू कैसे कहलाए ?

इतिहास में हमने पढ़ा है कि पहले लोग जब खानाबदोश हुआ करते थे  अपने भोजन की तलाश में एक जगह से दूसरे स्थान तक उनको भटकना पड़ता था ।  जहां पर उनको भोजन मिलता था, वही कुछ दिनों के लिए रुक जाते थे। कुछ समय के पश्चात उन्हें महसूस किया कि अब हमे एक जगह पर रुके रहना चाहिए।  तब मानव एक स्थान पर रुक कर जिवन जिने लगा और धिरे धिरे सभ्यता का विकास होने लगा ।

हमारी भारतीय सभ्यता भी सिंधु नदी के किनारे से ही प्रारंभ हुआ है इसी प्रकार अन्य  सभ्यता का विकास भी नदियों के किनारे हुआ है उनमें से एक हमारी सिंधु नदी किनारे बसी हुई सभ्यता भी है|

सिंधुघाटी सभ्यता

प्राचीन समय में लोग व्यापार के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते थे जब दूसरे लोग हमारे यहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक नई सभ्यता है जो नदी किनारे बसा हुआ है उस नदी का नाम सिंधु था उन्होंने सिंधु नदी के नाम पर वहां के लोगों का नाम  सिंधि दिया |

सिंधु नदी का दुसरा नाम Indus भी था तो वहाँ के लोगो को हिंदु भी कहा जाने लगा इस प्रकार हिंदुओ का नाम हिंदु पडा| तब से वहां के लोग  हिंदू कहलाने लगे  इस प्रकार हम धीरे-धीरे पूरे विश्व में हिंदू के नाम से जाने जाने लगे और हम अपने आप को हिंदू मानने लगे। जहाँ हिंदु रहते थे उस देश को हिंदुस्तान कहा गया । यह हमारे हिंदु नाम पड्ने का इतिहास है जो हम अपनी किताबो मे पढते आये है|

परंतु हमारी जो सभ्यता है प्राचीन समय से ही है और सनातन सभ्यता है और समय के साथ हम अपनी सभ्यता को भूलते गए और जो दूसरों के  द्वारा दिया गया नाम जैसे हिंदू वह हमें याद रह गया किंतु आज भी हम अपनी पुरानी परंपरा को अपनाते हैं और मानते हैं हिंदू की जो सभ्यता या नियम है वह सनातन नियम है और प्राचीन समय से ही है|

एक समय था जब हम अपने भारत को सोने की चिड़िया कहते थे यानी कि उस वक्त सोने की चिड़िया थी(धन,साधन,व्यवस्थाऐ,सम्रिद्धि आदि)  तब हम उस वक्त कल्पना कर सकते हैं कि उस वक्त के लोग को क्या कहते होंगे या किस धर्म से नाम से जानते होंगे हिंदू नाम तो बाद में पढ़ा और हिंदू की पहचान भी बाद में मिला | 

सनातन धर्म

 जिस वक्त हमारा भारत सोने की चिड़िया था उस समय अन्य धर्म नहीं था हिंदू धर्म था जिसको हम पहले आदि सनातन धर्म या देवी देवता धर्म के नाम से भी जानते हैं जिसको हम दूसरा नाम सनातन धर्म से मानते हैं सनातन धर्म का अर्थ होता है सदा ही बने रहना जिसका आदि है ना ही अंत है|

सोने कि चिडिया भारत

भारत का नाम भारत पड्ने का भी एक अलग इतिहास है परंतु भारत देश का नाम भारत शुरू से ही एक है भारत का मतलब होता है भाईचारा (भाई-भाई),

आज जो हम छोटा सा भारत देख रहे है असल मे भारत इतना छोटा नही था अगर हम कुछ दशक पहले की बात करें तो हमारा भारत चाइना की सीमाओं से लेकर अफगानिस्थान की सीमाओं से जुड़ा हुआ था|

आज हम देख रहे है कि पुरी पृथ्वी  सात बडे महाद्विप तथा महासागर है एवं अन्य छोटे-छोटे द्विपो मे बटाँ हुआ है  परंतु इतिहास और कई सबूतों से हम यह बात कह सकते हैं कि  पूरा महाद्विप जैसे एशिया, अफ्रीका, अमेरिका आदि यह सब एक ही खंड हुआ करते थे आपस में जुड़े हुए थे उसा समय कोई अन्य खण्ड नही था ना ही एशिया, अफ्रिका और अमेरिका जैसे देश थे पुरे विश्व पर एक हि सम्पुर्ण भुमि थी एक ही सनातन धर्म और एक हि विशाल राज्य हुआ करता था|

समय के साथ प्रकृति में बदलाव होते गए और विशाल भुमि कई खंडो मे बट गया और अलग-अलग दीपों और महासागरों का निर्माण हो गया|इस प्रकार अलग अलग महाद्विप का निर्माण हुआ और बाद मे कई देश, धर्म ,सम्प्रदाय, राजनैतिक समुदाय का विकास हुआ|

बात अगर  हिंदू धर्म की करे तो हिंदु अपने आप में खुद धर्म नहीं है बस नाम हिंदू पड़ा है परंतु  धर्म सनातन धर्म हि है बाद मे अन्य धर्म का विकास हुआ है जैसे मुस्लिम धर्म, क्रिश्चन धर्म, बौद्ध धर्म इस प्रकार धीरे-धीरे अन्य धर्मों का विकास होता गया और सनातन धर्म धीरे-धीरे लुप्त होता गया|

आप देखेंगे कि अन्य सभी धर्मों के अपने अलग-अलग धार्मिक किताबें हैं जैसे मुसलीम धर्म का कुरान हैं क्रिश्चियन धर्म का बाइबल है इस प्रकार सभी धर्मों के अपने-अपने धार्मिक किताबें हैं किंतु हिंदू धर्म ऐसी कोई किताब नहीं जिसको हम आधार माने |

अगर हिंदू धर्म में किताबों की बात करें तो हमारे यहां कई सारी किताबें हैं जिनमें से है हम वेद को मान सकते हैं शास्त्र को मान सकते हैं सबसे बड़ी ज्ञांनवर्धक किताब गीता है जिसको मान सकते हैं किंतु कोई एक किताब नहीं है इन किताबो मे लिखी गई सारी बाते प्राणी और प्रकृति के अनुकूल है|

जो सनातन धर्म के साधु,संत,ऋषि-मुनि थे एक प्रकार के वैज्ञानिक थे जो प्रकृति की हर एक नियम को समझ कर उसके आधार पर नियम बनाना और उनको पालन करने की विधियां किताबों में लिखी गई |

अगर हिंदु अपनी पहचान सिर्फ हिंदू मानते हैं तो यह  सीमा में बंधने की है बात हो जाती है किंतु जब धर्म ही प्राचीन और आदि सनातन धर्म है तो हर एक नियम भी प्राचीन और निरंतर प्रकृति के अनुकूल है|

 

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